पड़ोसी देश में कांपी धरती, भूकंप के झटकों से सहमे लोग; रिक्टर स्केल पर 5.5 रही तीव्रता
*पड़ोसी देश में कांपी धरती, भूकंप के झटकों से सहमे लोग; रिक्टर स्केल पर 5.5 रही तीव्रता*
पड़ोसी देश नेपाल में भूकंप के झटके लगने की खबर है। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। फिलहाल, राहत की बात यही है कि भूकंप में जानमाल के नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
नेपाल में 5.5 तीव्रता के भूकंप के झटके लगे हैं। पड़ोसी देश में धरती कांपने के कारण लोगों के भीतर दहशत का माहौल है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक गुरुवार आधी रात के बाद करीब 2.36 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। भूकंप का केंद्र धरती से 10 किलोमीटर की गहराई में रहा
बिहार में भी महसूस किए गए भूकंप के झटके
नेपाल की सीमा से सटे बिहार के कई जिलों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटके लगने से लोग सहम गए। दहशत के चलते लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
*एक हफ्ते के भीतर दूसरा झटका*
इससे पहले विगत 22 फरवरी को भी भूकंप के कारण धरती डोली थी। नेपाल के अलावा उत्तराखंड और लखनऊ तक भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इस झटके के बारे में लखनऊ के आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया था कि भूकंप का केंद्र लखनऊ से 310 किलोमीटर उत्तर उत्तर पूर्व की ओर था। उत्तराखंड में जोशीमठ के पास भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
*असम में 5.0 तीव्रता का आया था भूकंप*
इससे पहले, 27 फरवरी को असम के मोरीगांव में भूकंप के झटके महसूस किए गए। आधी रात करीब 2.25 बजे धरती हिली। इस दौरान रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.0 दर्ज की गई
*भूकंप के दौरान क्या करें*
भूकंप के दौरान जितना संभव हो उतना सुरक्षित रहें। इस बात के प्रति सतर्क रहें कि कौन-से भूकंप वास्तव में इसकी पूर्व-चेतावनी देने वाले भूकंप के झटके होते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है। धीरे-धीरे कुछ कदमों तक सीमित हलचल करें जिससे पास में किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें और भूकंप के झटकों के रुकने पर घर में तब तक रहें जब तक कि आपको यह सुनिश्चित हो जाएं कि बाहर निकलना सुरक्षित है।
*जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?*
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
*कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता और क्या है मापने का पैमाना?*
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।