भारत ने किया इस्राइल-हमास युद्ध विराम समझौते का स्वागत, कहा- अब गाजा में बढ़ेगी मानवीय सहायता
*भारत ने किया इस्राइल-हमास युद्ध विराम समझौते का स्वागत, कहा- अब गाजा में बढ़ेगी मानवीय सहायता*
विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम बंधकों की रिहाई और गाजा में युद्ध विराम के लिए समझौते की घोषणा का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि इससे गाजा के लोगों को मानवीय सहायता की सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति होगी। हमने लगातार सभी बंधकों की रिहाई, युद्ध विराम, बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया है
इस्राइल-हमास के बीच हुए युद्ध विराम समझौते का भारत ने स्वागत किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने समझौते के बाद गाजा में शांति और मानवीय सहायता बढ़ने की उम्मीद जताई है
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम बंधकों की रिहाई और गाजा में युद्ध विराम के लिए समझौते की घोषणा का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि इससे गाजा के लोगों को मानवीय सहायता की सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति होगी। हमने लगातार सभी बंधकों की रिहाई, युद्ध विराम, बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया है।
*कैसे शुरू हुई इस्राइल-हमास के बीच जंग*
सात अक्तूबर 2023 को हमास ने इस्राइल के कई हिस्सों को निशाना बनाया था। इस हमले में करीब 1200 इस्राइली नागरिक मारे गए थे। जबकि ढाई सौ लोगों बंधक बना लिया गया। इसके बाद इस्राइल ने गाजा पर हमले शुरू किया। इस्राइली सेना के हमलों में अब तक 45 हजार से ज्यादा फलस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। गाजा के बड़े हिस्से मलबे में तब्दील हो चुके हैं। गाजा की 23 लाख की आबादी का करीब 90 फीसदी हिस्सा विस्थापित हो चुका है। लाखों लोग तंबू में रह रहे हैं। लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं।
*समझौते में क्या-क्या?*
कतर की राजधानी में कई सप्ताह तक चली कड़ी बातचीत के बाद हुए समझौते में कई शर्तें लगाई गईं हैं। हमास ने बंधक बनाए गए दर्जनों लोगों को चरणबद्ध तरीके से रिहा करने पर सहमति जताई है। इस्राइल भी अपने कैद से सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों को रिहा करने के लिए सहमत हो गया है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, 'प्रशासन ने 8 महीने की लगातार बातचीत के बाद युद्धविराम और बंधक समझौते पर सहमति बनाने में सफलता पाई है। यह समझौता तीन चरण में लागू होगा। यह समझौता 19 जनवरी 2025 से प्रभावी होगा और इसमें तीन चरणों में शांति लाने की योजना है। साथ ही मामले में कतर, मिस्र और अमेरिका ने यह सुनिश्चित करने का वचन दिया है कि सभी तीन चरणों का पालन किया जाएगा और यह समझौता पूरी तरह से लागू होगा। इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को सफल बनाने का भी वादा किया है।