पूर्व सीजेआई को राहत; जस्टिस चंद्रचूड़ के खिलाफ सुनवाई से लोकपाल का इनकार, पद पर रहते हुई थी शिकायत
*पूर्व सीजेआई को राहत; जस्टिस चंद्रचूड़ के खिलाफ सुनवाई से लोकपाल का इनकार, पद पर रहते हुई थी शिकायत*
शीर्ष कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय लोकपाल ने 3 जनवरी के आदेश में विस्तार से समीक्षा की कि लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून की धारा-14 के तहत क्या पद पर रहते हुए कोई चीफ जस्टिस या सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए गठित लोकपाल संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के खिलाफ आरोपों पर सुनवाई करने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। आधिकारिक आदेश में लोकपाल ने कहा कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ 18 अक्तूबर, 2024 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। उन पर पद और अधिकार का दुरुपयोग कर चुनिंदा नेताओं व राजनीतिक दलों के हितों का बचाव करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत में इसे भ्रष्टाचार के बराबर कहा गया था। जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए थे।
शीर्ष कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय लोकपाल ने 3 जनवरी के आदेश में विस्तार से समीक्षा की कि लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून की धारा-14 के तहत क्या पद पर रहते हुए कोई चीफ जस्टिस या सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। लोकपाल ने 382 पन्नों में दी गई शिकायत पर विचार करने से बचने का फैसला किया और कहा, हम अधिकार क्षेत्र से प्रतिबंधित होने के आधार पर शिकायत को खारिज करते हैं।
*लोकपाल ने यह भी कहा...*
लोकपाल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट समेत किसी भी कोर्ट का न्यायाधीश एक लोकसेवक है और के वीरास्वामी बनाम भारत संघ और अन्य मामले में शीर्ष कोर्ट की संविधान पीठ के निर्णय के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक कानून सहित भ्रष्टाचार के मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। प्रश्न यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट संसद के अधिनियम से स्थापित निकाय है। आदेश में कहा गया है लोकपाल अधिनियम की धारा 14 पूरी तरह स्पष्ट और परिभाषित है और व्याख्या के लिए जगह नहीं छोड़ती।
*लोकपाल अधिनियम की धारा 14...*
दायरे में आते हैं पीएम और सरकारी अधिकारी, मौजूदा जज नहीं
लोकपाल ने अधिनियम की धारा-14 के तहत विभिन्न प्रावधानों की जांच की। इसके तहत लोकपाल की जांच के अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री, मंत्री, संसद सदस्य, समूह ए, बी, सी और डी के अधिकारी और केंद्र सरकार के अन्य अधिकारी शामिल हैं।
लोकपाल ने कहा कि धारा 14 की शाब्दिक व प्रासंगिक व्याख्या हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाती है कि इस प्रावधान में पदनाम या विवरण के साथ संदर्भित व्यक्तियों को लोकपाल के अधिकार क्षेत्र के लिए उत्तरदायी बनाया गया है। निस्संदेह, मौजूदा जज या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश खंड (ए) से (ई), (जी) और (एच) के दायरे में नहीं आएंगे।