राष्ट्रपति पुतिन को बड़ा झटका, मॉस्को बम धमाके में रूस के परमाणु सुरक्षा बल प्रमुख की गई जान
*राष्ट्रपति पुतिन को बड़ा झटका, मॉस्को बम धमाके में रूस के परमाणु सुरक्षा बल प्रमुख की गई जान*
रूस के परमाणु, जैविक और रासायनिक सुरक्षा बलों के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव की क्रेमलिन के पास एक अपार्टमेंट के बाहर हत्या कर दी गई।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक बड़ा झटका लगा है। यहां की राजधानी मॉस्को में मंगलवार को एक बड़ा धमाका हुआ, जिसमें रूस के परमाणु, जैविक और रासायनिक सुरक्षा बलों के प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव की मौत हो गई।
*अपार्टमेंट के बाहर हत्या*
किरिलोव की क्रेमलिन के पास रियाजांस्की प्रॉस्पेक्ट पर स्थित एक अपार्टमेंट के बाहर हत्या कर दी गई।
*स्कूटर में छिपाया गया था बम*
रूसी जांच एजेंसियों के अनुसार, धमाका एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में छिपाए गए बम के कारण हुआ। बम फटने से किरिलोव और उनके एक सहायक की जान चली गई। रूस की समाचार एजेंसी तास ने एक कानून प्रवर्तन अधिकारी के हवाले से बताया कि विस्फोटक उपकरण की क्षमता करीब 300 ग्राम टीएनटी के बराबर थी।
*जहां धमाका हुआ वहां नहीं लगे थे कैमरे*
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस इलाके में धमाका हुआ, वहां के निवासियों का कहना है कि वहां निगरानी कैमरे नहीं थे। उन्होंने बताया, वहां के लोग सालों से कह रहे थे कि कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे और उनकी निगरानी नहीं हो रही है। मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (एसबीयू) ने कहा कि सोमवार को यूक्रेनी अभियोजकों ने किरिलोव पर यूक्रेन में प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है।
अक्तूबर में, यूनाइटेड किंगडम ने किरिलोव और परमाणु सुरक्षा बलों को रिपोर्ट की गई घटनाओं के आधार पर दंगा नियंत्रण एजेंटों और विषाक्त गैस क्लोरोपिक्रिन के इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। क्लोरोपिक्रिन एक तैलीय तरल है, जो पहले विश्व युद्ध में आंसू गैस के रूप में इस्तेमाल होता था। रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाले संगठन (OPCW) ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई है।
*कोई सैन्य रासायनिक शस्त्रागार नहीं: रूस*
रूस ने कहा है कि उसके पास अब कोई सैन्य रासायनिक शस्त्रागार नहीं है, लेकिन वह जहरीले हथियारों के कथित इस्तेमाल को लेकर बढ़ती जांच और पारदर्शिता का सामना कर रहा है।
यूक्रेन की सुरक्षा सेवा ने यह भी कहा कि उसने फरवरी 2022 से अब तक युद्ध के मैदान पर 4,800 से ज्यादा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के मामले दर्ज किए हैं, जिसमें विशेष रूप से के-1 ग्रेनेड शामिल हैं।