भारत ने गाजा में तत्काल स्थायी युद्धविराम के लिए प्रस्ताव के पक्ष में किया वोट, मतदान से दूर रहे 13 देश
*भारत ने गाजा में तत्काल स्थायी युद्धविराम के लिए प्रस्ताव के पक्ष में किया वोट, मतदान से दूर रहे 13 देश*
प्रस्ताव में कहा गया कि सभी पक्षों को सुरक्षा परिषद के जून 2024 के प्रस्ताव के तहत गाजा में तत्काल युद्ध विराम, बंधकों की रिहाई, फलस्तीनी कैदियों का आदान-प्रदान, मृतक बंधकों के शवों की वापसी और गाजा के नागरिकों को उनके घरों और क्षेत्रों में लौटने की अनुमति होनी चाहिए।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जिसमें गाजा में तत्काल बिना शर्त और स्थायी युद्ध विराम की मांग की गई है। इस प्रस्ताव में सभी बंधकों की भी तत्काल रिहाई की मांग की गई है। यह प्रस्ताव यूएनजीए के आपातकालीन सत्र में बुधवार को इंडोनेशिया की ओर से पेश किया गया था और इसमें गाजा में तत्काल युद्ध विराम और सभी बंधकों की रिहाई की मांग की गई थी।
193 सदस्यीय महासभा में 158 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। नौ देशों ने इसके खिलाफ वोट किया, जिनमें इस्राइल और अमेरिका प्रमुख थे। 13 देशों ने वोट करने से दूरी बनाई, जिनमें अल्बानिया और यूक्रेन शामिल थे।
*यूएन के प्रस्ताव में क्या कहा गया*
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि सभी पक्षों को सुरक्षा परिषद के जून 2024 के प्रस्ताव के तहत गाजा में तत्काल युद्ध विराम, बंधकों की रिहाई, फलस्तीनी कैदियों का आदान-प्रदान, मृतक बंधकों के शवों की वापसी और गाजा के नागरिकों को उनके घरों और क्षेत्रों में लौटने की अनुमति होनी चाहिए।
*गाजा में निर्बाध मानवीय मदद पहुंचाने की मांग*
इसके अलावा, प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि गाजा की नागरिक आबादी को बुनियादी सुविधाओं और मानवीय मदद तक तत्काल पहुंच प्रदान की जाए। इसमें यह सुनिश्चित करने की बात की गई कि गाजा में मानवीय मदद बिना किसी बाधा के पहुंचाई जाए।
*अन्य प्रस्ताव पर पहले भी वोट कर चुका भारत*
पिछले हफ्ते भारत ने एक और प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया था, जिसमें इस्राइल से 1967 से कब्जाए गए फलस्तीनी क्षेत्रों से अपनी सेनाओं को हटाने की मांग की गई थी। जिसमें पूर्वी यरूशलम भी शामिल है। भारत ने इन दोनों प्रस्तावों के जरिए पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की जरूरत पर जोर दिया है।