पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत ने जाहिर की चिंता', केंद्र सरकार ने संसद में दी जानकारी
*पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत ने जाहिर की चिंता', केंद्र सरकार ने संसद में दी जानकारी*
भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में ऑपरेशन संकल्प चला रही है ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भारतीय जहाजों, नाविकों और माल की सुरक्षा हो। अब तक नौसेना ने 30 जहाजों और हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है और 350 से ज्यादा लोगों को बचाया है।
पश्चिम एशिया में इन दिनों सामने आ रही कई सारी समस्याओं को लेकर चिंतित है। लाल सागर और उसके आस-पास व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमले, जहाजों की आवाजाही की आज़ादी और हमारे व्यापार पर बुरा असर डाल रहे हैं। सरकार ने इस मुद्दे पर क्षेत्र के देशों से बात की है और हमारे मिशन स्थिति पर नजर रख रहे हैं ताकि इसके असर को कम किया जा सके।
बता दें कि केंद्र सरकार एक बहु-स्तरीय योजना पर काम कर रही है, जिसमें अलग-अलग स्रोतों से आपूर्ति लेना, देश में तेल-गैस का उत्पादन बढ़ाना, नए ऊर्जा स्रोत अपनाना और ऊर्जा के इस्तेमाल को और बेहतर बनाना शामिल है।
*एक नजर ऑपरेशन संकल्प पर*
भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में ऑपरेशन संकल्प चला रही है ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भारतीय जहाजों, नाविकों और माल की सुरक्षा हो। अब तक नौसेना ने 30 जहाजों और हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है और 350 से ज्यादा लोगों को बचाया है, जिनमें 120 से ज्यादा अलग-अलग देशों के लोग शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार नौसेना ने समुद्री लुटेरों से कई जहाजों और उनके चालक दल को बचाया है, जैसे एमवी लीला नोरफोक, एमवी रुएन और अन्य जहाज। इसके अलावा, भारतीय जहाजों की सुरक्षा करते हुए 91 लाख मीट्रिक टन सामान का सुरक्षित पारगमन करवाया है।
*एएसआई का सर्वेक्षण*
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में जानकारी दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपने सर्वेक्षण में पाया है कि 18 संरक्षित स्मारक और स्थल अच्छी स्थिति में नहीं हैं। बता दें कि 2013 में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 92 संरक्षित स्मारक गायब पाए गए थे। अब तक इनमें से 74 स्मारकों का पता लगाया जा चुका है। जहां मंत्री ने कहा कि एएसआई को देश के 3,690 से अधिक संरक्षित स्मारकों और स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
*स्मारकों पर दवाब एक बड़ी चुनौती*
सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि तेजी से शहरीकरण के कारण स्मारकों पर दबाव बढ़ रहा है, जो एक बड़ी चुनौती है। स्मारकों की निगरानी मल्टी-टास्किंग स्टाफ, सुरक्षा गार्ड और समय-समय पर निरीक्षणों के जरिए की जाती है।
इसके साथ ही एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि यदि संरक्षित क्षेत्रों के 100 मीटर के भीतर (निषिद्ध क्षेत्र) या 200 मीटर तक (विनियमित क्षेत्र) कोई अनधिकृत निर्माण होता है, तो एएसआई 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातत्व अधिनियम के तहत कार्रवाई करता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों में इस तरह के अनधिकृत निर्माणों के मामले दर्ज किए गए हैं। इस तरह सरकार स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।