इतिहास का सबसे लंबा युद्ध, खूब हुआ खून खराबा; आखिर क्यों राष्ट्रपति असद को सत्ता छोड़ भागना पड़ा- पूरी टाइमलाइन

इतिहास का सबसे लंबा युद्ध, खूब हुआ खून खराबा; आखिर क्यों राष्ट्रपति असद को सत्ता छोड़ भागना पड़ा- पूरी टाइमलाइन

*इतिहास का सबसे लंबा युद्ध, खूब हुआ खून खराबा; आखिर क्यों राष्ट्रपति असद को सत्ता छोड़ भागना पड़ा- पूरी टाइमलाइन*

सीरिया में एचटीएस विद्रोहियों के कब्‍जे के बाद सीरियाई राष्‍ट्रपति बशर अल असद अब रूस पहुंच गए हैं। असद सरकार का तख्तापलट हो गया है राष्ट्रपति बशर अल-असद विद्रोहियों के हमले के बाद देश छोड़कर भाग गए हैं। सीरिया में विद्रोह की शुरुआत कब और कैसे हुई थी? अब आपको आगे 13 साल पुराने इस युद्ध के पीछे का पूरा इतिहास बताते हैं

सीरिया में एचटीएस विद्रोहियों के कब्‍जे के बाद सीरियाई राष्‍ट्रपति बशर अल असद अब रूस पहुंच गए हैं। असद सरकार का तख्तापलट हो गया है, राष्ट्रपति बशर अल-असद विद्रोहियों के हमले के बाद देश छोड़कर भाग गए हैं। असद ने रूस में राजनीतिक शरण ली है।


सीरिया के इस विद्रोह के बाद दुनियाभर के देशों के रिएक्शन भी सामने आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, सीरिया में विद्रोह की शुरुआत कब और कैसे हुई थी? अब आपको आगे 13 साल पुराने इस युद्ध के पीछे का पूरा इतिहास बताते हैं।

*फरवरी 2011*

सीरिया में सुधार की मांग को लेकर ट्यूनीशिया, मिस्र और लीबिया में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कई छोटे-छोटे प्रदर्शन किए गए थे। सीरियाई सुरक्षा बल कई लोगों को गिरफ्तार करके प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में सक्षम रहे हैं।

*6 जून, 2011*

सीरियाई आधिकारिक मीडिया ने बताया कि तुर्की सीमा के पास उत्तरी शहर जिसर अल-शुघुर में सशस्त्र गिरोहों ने 120 सैनिकों की हत्या कर दी थी। इस बीच विपक्ष के सदस्यों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार करने पर सैनिकों को मार दिया गया।

2013 - लेबनान के हिजबुल्ला ने असद को कुसैर में जीत दिलाने में मदद की। विद्रोहियों की गति को रोका और टकराव में ईरान समर्थित इस समूह की बढ़ती भूमिका को दिखाया। अमेरिका ने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को रेड लाइन तो घोषित कर दिया, लेकिन दमिश्क के पास विद्रोहियों के कब्जे वाले पूर्वी घोउटा पर गैस हमले के बावजूद अमेरिकी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसमें कई नागरिक मारे गए थे।

*2014* में अलकायदा के एक गुट ने रक्का पर कब्जा कर लिया और सीरिया और इराक में शहरों पर कब्जा करते हुए इस्लामिक स्टेट का गठन कर लिया।

2018 - सीरियाई सेना ने पूर्वी घोउटा पर फिर से कब्जा कर लिया।

*2019* - इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में अपना आखिरी इलाका भी खो दिया। रूसी मदद से असद सेना ने खान शेखुन को भी अपने नियंत्रण में ले लिया।

*2020*- असद शासन ने अधिकांश क्षेत्र और सभी मुख्य शहरों पर कब्जा कर लिया। विद्रोहियों ने उत्तर-पश्चिम पर कब्जा कर लिया। तुर्किये समर्थित सेना ने सीमा पट्टी पर कब्जा कर लिया। कुर्द नेतृत्व वाली सेना ने उत्तर-पूर्व पर नियंत्रण कर लिया।

*2023* - सात अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले ने लेबनान में इजरायल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई शुरू कर दी। इससे अंतत: सीरिया में समूह की उपस्थिति कम हो गई और इसने असद शासन को कमजोर कर दिया। 

*17 सितंबर-26 नवंबर 2024*

पड़ोसी लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायली की लड़ाई से हिजबुल्लाह को जबरदस्त झटका लगा, इसने अक्टूबर में सीरिया से अपने लड़ाकों को वापस बुलाकर अपनी अग्रिम पंक्ति को मजबूत किया। इसके बाद 26 नवंबर को एक नाजुक युद्धविराम समझौते ने हिजबुल्लाह को सीमित अवसर दिए गए।

कुछ दिनों बाद 27 नवंबर को विद्रोही बल हयात तहरीर अल-शाम (HTS) ने एक नया आक्रमण शुरू किया।विद्रोहियों ने अलेप्पो पर एक नया हमला किया। असद के सहयोगियों के कहीं और ध्यान केंद्रित करने के कारण उसकी सेना जल्दी ही ढह गई।

*7 दिसंबर, 2024*

फिर दिसंबर के महीने में HTS ने दारा और होम्स पर नियंत्रण कर लिया, जिससे दमिश्क प्रभावी रूप से अलग-थलग पड़ गया। विद्रोही बल कुछ घंटों बाद दमिश्क में प्रवेश करते हैं, क्योंकि रिपोर्ट सामने आती है कि असद भाग गया है।

*8 दिसंबर 2024*

इसके बाद 8 दिसंबर को विद्रोही बलों ने असद को सत्ता से हटा दिया और दमिश्क को आजाद घोषित कर दिया गया।