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गोवर्धनमठ पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद प्रयागराज में हिंदूराष्ट्र संगोष्ठी में कहा कि सबको इकट्ठा करके भारत को हिंदूराष्ट्र नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि हिंदुओं को संगठित करना तराजू पर मेढक तौलने जैसा है।

हिंदुओं में पद, प्रतिष्ठा पाने की लालसा अधिक होती है, सबको संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। कार्य करने की एक शैली होती है, हम अपना कार्य करते जा रहे हैं। सबको इकठ्ठा करने चलेंगे तो विप्लव हो जाएगा।

नेपाल से आए एक दंपती की जिज्ञासा का मार्गदर्शन करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि नेपाल को हिंदूराष्ट्र बनाने के प्रति मेरी आस्था थी। नेपाल को चीन की कुटिल चालों से भी बचाना चाहते थे, इसी भाव से नेपाल की कई यात्राएं भी की थीं किंतु नेपाल की विचित्र दिशाहीनता देख व्यथित हो गया और उधर से अपना ध्यान ही हटा लिया। शंकराचार्य ने कहा, सत्ता लोलुपता और स्वार्थ की पराकाष्ठा तो देखिए, नेपाल के अनमोल ग्रंथागार को जलाने वाले दिशाहीन प्रचंड जैसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया गया। नेपाल के राजनीतिज्ञ चीन की कूटनीति के आगे नतमस्तक हैं।