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आबादी में खसरे के प्रसार का पता लगाने के लिए देश के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी तकनीक खोजी है। यह तकनीक सस्ती होने के साथ ही 99 फीसदी तक असरदार है। वैज्ञानिकों ने जीवित वायरस का उपयोग करके इसजांच तकनीक की खोज की है जो लोगों में एंटीबॉडी की पहचान करने में सक्षम है।यह तकनीक कुछ दिनों बाद देश में होने वाले राष्ट्रीय सीरो सर्वे में मददगार होगी।

पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने खसरे का पता लगाने के लिए एक स्वदेशी खसरा रोधी आईजीएम एलिसा परीक्षण विकसित किया है। इंसानों के सीरम में मौजूद एंटीबॉडी से बीमारी के फैलाव का आकलन किया जा सकता है।