अंतर्राष्ट्रीय
वॉट्सऐप और इसकी पैरेंट कंपनी मेटा ने 2021 में देश में लाए गए इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) नियमों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट में गुरुवार (25 अप्रैल) को दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई. आईटी नियमों में कहा गया है कि सोशल मीडिया मैसेजिंग कंपनियों के लिए किसी चैट का पता लगाने और मैसेज को सबसे पहले क्रिएट करने वाले शख्स का पता लगाने के लिए प्रावधान करना जरूरी होगा. मेटा के सीईओ मार्क जुबरबर्ग हैं.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉट्सऐप की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में वकील तेजस कारिया पेश हुए. उन्होंने कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ से कहा, "एक प्लेटफॉर्म के तौर पर हम कह रहे हैं कि अगर हमें एन्क्रिप्शन तोड़ने के लिए कहा जाता है, तो हम यहां से चले जाएंगे."
कंपनी की परेशानी बताते हुए वकील ने कहा, "हमें मैसेजों की एक पूरी चेन तैयार रखनी होगी. हमें नहीं पता है कि कौन से मैसेज को डिक्रिप्ट करने के लिए कह दिया जाए. इसका मतलब हुआ कि लाखों-करोड़ों मैसेजों को कई सालों तक स्टोर करके रखना पड़ेगा."
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा जैसे मामलों में आपत्तिजनक कंटेट प्लेटफॉर्म पर फैलाया जाता है, इसलिए आईटी नियम जरूरी हो जाता है. हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि इस मामले पर 14 अगस्त को सुनवाई होगी, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आईटी नियमों के कई पहलुओं को चुनौती देने वाली अन्य सभी याचिकाएं उसके पास ट्रांसफर हो जाएं.