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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि अगर किसी महिला वकील की नियुक्ति नियमित कर्मचारी की जगह 'एक पेशेवर' के रूप में की गई है, तो ऐसे में वह मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत मिलने वाले मैटरनिटी के लाभ पाने की हकदार नहीं होगी।