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मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने आयुर्वेद के चिकित्सकों से अपने नाम के आगे डॉक्टर न लिखकर वैद्य लिखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में राजाओं के दरबार में जिस प्रकार कुल गुरू होते थे, उसी प्रकार कुल वैद्य भी होते थे। वैद्य की प्रथा हमारे देश की बहुत बड़ी ताकत थी। उस ताकत को महसूस किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीनतम विधा 'आयुर्वेद' का अपना एक विशेष महत्व है। हमारा देश आयुर्वेद का मूल स्थल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय चिकित्सा पद्धति चाहे आयुर्वेद हो, योग हो, सिद्धा हो, प्राकृतिक हो सभी में 'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामय' की कामना की गई है। भगवान धन्वन्तरि ने आयुर्वेद को जन्म देकर एक बहुत बड़ी विधा मानव कल्याण के लिये हम सभी को दिया है।