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दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। इस पीआईएल में सराकारी पैसों से इमामों और मुअज्जिनों को वेतन देने की नीति को चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वित्त विभाग को भी पक्षकार बनाया और सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता वकील रुकमणि सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान कहता है कि राज्य को सेक्युलर रहना है और इसलिए एक धर्म के लोगों को वेतन/मानदेय देने की दिल्ली सरकार की नीति संविधान के खिलाफ है।
इस मामले की अगली सुनवाई अब 22 जुलाई को होगी।