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चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले एक महत्वपूर्ण आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर ऐसा करना "अराजकता पैदा करना" होगा.
जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने कहा, ''आप यह नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग कार्यपालिका के अधीन है.'' याचिकाकर्ताओं की ओर इशारा करते हुए कि यह नहीं माना जा सकता कि केंद्र द्वारा बनाया गया कानून गलत है, पीठ ने कहा, "जिन लोगों को नियुक्त किया गया है उनके ख़िलाफ़ कोई आरोप नहीं हैं... चुनाव नजदीक हैं, सुविधा का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है."
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023, पिछले साल संसद द्वारा पारित किया गया था और बाद में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी. नए कानून में चुनाव आयुक्तों को चुनने के लिए एक समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया. समिति में अब प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता हैं.