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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह संस्कार है। इसे दस रुपये के स्टांप पर निष्पादित एकतरफा घोषणा पत्र के आधार पर भंग नही किया जा सकता। इसके लिए हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों का पालन करना जरूरी है। 




यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने पारिवारिक न्यायालय द्वारा 14 साल से अलग रह रही पत्नी को भरण पोषण देने के आदेश के खिलाफ कथावाचक पति विनोद कुमार उर्फ संतराम की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।